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#मस‌अला
बच्चे की उम्र दस साल हो जाये और उसमे रोजा रखने की ताकत हो तो उससे रोजा रखवाया जाये
न रखे तो मार कर रखवायें
अगर पूरी ताकत देखी जाये रखकर तोड़ दिया तो कज़ा का हुक्म न देंगे
लेकिन नमाज़ फिर भी पढ़वाया जाये
अल्लाह ﷻकी बारगाह मे दुआ है हमे दीन की बातों पर और अपने प्यारे नबीﷺ के सुन्नतों पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए आमीन