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यौमे विशाल 18 रमजान उल मुबारक
हजरत खालिद बिन वलीद रदिअल्लाहु अनहु
तकरीबन 125 जंगे लड़ी और हारे नही हैं

हजरत खालिद बिन वलीद रदि अल्लाहु अनहु का पैगाम
मौत लिखी न हो तो मौत खुद जिंदगी की हिफाजत करती है
और जब मौत मुकद्दर हो तो जिंदगी खुद दौड़कर मौत से लिपट जाती है
जिंदगीसे ज्यादा कोई जी नही सकता और मौत से पहले कोई मय नही सकता
दुनिया के बुजदिलों को मेरा ये पैगाम पहुंचादो अगर मौत मैदाने जिहाद मे लिखी होती तो खालिद बिन वलीद को मौत बिस्तर पर न आती
खालिद बिन वलीद रदिअल्लहुअनहु 200से ज्यादा जंगें की है और जिस्म का कोई ऐसा हिस्सा नही है जंहां जख्मों के गहरे निशान न हों फिर भी आपकी मौत बिस्तर हुई है

म‌अजरत के साथ
आपलोग पोस्ट को ध्यान से पढ़ लिया करो उसके ब‌अद अपनी स्टोरी मे शैर किया करो कभी कभी ये होता है कि हम लिखना कुछ चाहिते हैं लिख कुछ जाता है आटो टाईपिंग की वजह से
इस्से नुक्सान ये होता है कि हम भी गुनहगार होते हैंआप भी
आप पढ़कर करें जो गलतिंयां हो उसकी वजहत करेंउसको सही करके तब आगे शैर किया जायेगा
अस्सलामो अलैकुम वा रहमातुल्लाही बराकतहू
दुआ का तालिब
रमजान शेख
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