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तमाम गुनाहों की माफ़ी की दुआ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذَنْبِي كُلَّهُ دِقَّهُ وَجِلَّهُ وَأَوَّلَهُ وَآخِرَهُ وَعَلَانِيَتَهُ وَسِرَّهُ

"ऐ अल्लाह! मेरे सारे गुनाह माफ़ फरमा दे चाहे छोटे हों या बड़े! पहले हों या बाद के, खुले हों या छुपे हुए..."


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