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🌷कितनी जल्दी यह रमज़ान गुज़र जाता है प्यास लगती नहीं इफ्तार गुज़र जाता है हम गुनाहगारों की मगफिरत फरमा ऐ मेरे रब इबादत होती नहीं और रमज़ान गुज़र जाता है🌷
🥀🌷लब पर दुरूद का नग़्मा, दिल में है उनका अफ़साना, इश्क़-ए-नबी में डूबा है ये दिल का आशियाना।🌷🥀
"की मोहम्मद से वफ़ा तूने तो हम तेरे हैं, ये जहाँ चीज़ है क्या, लौह-ओ-क़लम तेरे हैं।"
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