*🌹ﺑِﺴْـــــــــــــﻢِﷲِالرَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ🌹*
*💚الصــلوة والسلام عليك يارسول الله صلی الله عليه وسلم💚*
*रमज़ान आया है लेकिन ज़रा अपने शहर के बाज़ार देखो ऐसा लग रहा है जैसे ईद आज ही है और आख़िरत कल ही खत्म हो जाएगी, रोज़ा तक़वा सिखाने आया था मगर हम उसे शॉपिंग फेस्टिवल बना बैठे भीड़ धक्का मुक्की फिज़ूलखर्ची घंटों बाज़ारों में घूमना क्या यही रमज़ान की रूह है*
*बहनों से भी सवाल है क्या हमारी खरीदारी में सादगी है या दिखावा क्या हमारा पर्दा सिर्फ कपड़े का है या चाल चलन और निगाह का भी और शौहरों से भी सवाल है, क्या हम घर में कुरआन की आवाज़ बढ़ा रहे हैं या ऑफ़र और डिस्काउंट की बातें गैरत का मतलब हराम से रोकना है हलाल को हराम बना देना नहीं लेकिन हलाल चीज़ को भी इस तरह करना कि दिल गाफ़िल हो जाए*
*ये भी सोचने की बात है याद रखो कपड़े नए हो जाएँ तो भी कब्र की चादर सफेद ही होगी मगर अगर दिल साफ़ न हुआ तो रमज़ान गुजर जाएगा और हम खाली हाथ रह जाएँगे, ये महीना अल्लाह से सौदा करने का है दुनिया से नहीं ये वक्त है आँसू बहाने का न कि सिर्फ बैग भरने का पहले दिल सजाओ फिर जिस्म पहले नीयत सुधारो फिर खरीदारी क्योंकि अगर रमज़ान में भी हम न बदले तो फिर कब बदलेंगे.!*
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Farhan Khan
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